
Odisha ओडिशा: ओडिशा वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट ने बाढ़ और मानसून के मौसम को देखते हुए अपने सभी कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी है। इस निर्णय का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी इमरजेंसी या आपदा की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने हेडक्वार्टर को छोड़ने से पहले संबंधित अधिकारी से अनुमति लें और बाढ़ या आपदा से जुड़ी किसी भी स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए हमेशा उपलब्ध रहें।
यह निर्णय डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बाढ़ से पहले तैयारियों की समीक्षा बैठक में लिया गया। इस बैठक में बाढ़ प्रबंधन, नदी किनारे सुरक्षा, जलाशयों के संचालन और फील्ड-लेवल पर इमरजेंसी सर्विस देने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे बाढ़ के दौरान किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में सक्रिय रहें और तुरंत मदद उपलब्ध कराएं।
डिपार्टमेंट की गाइडलाइंस के अनुसार, सभी अधिकारियों को बाढ़, नदी किनारे के टूटने, जलाशयों में पानी छोड़ने और अन्य आपदाओं से जुड़ी इमरजेंसी स्थितियों में हर समय तैयार रहना होगा। अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि वे जिला प्रशासन, पुलिस, रेवेन्यू अधिकारियों, पंचायती राज प्रतिनिधियों और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ घनिष्ठ तालमेल बनाए रखें। इसके अलावा, इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए जरूरी अधिकारियों, पब्लिक प्रतिनिधियों और उपकरण सप्लायर की अपडेटेड कॉन्टैक्ट डिटेल्स हमेशा उपलब्ध रखी जानी चाहिए।
बाढ़ और मानसून के दौरान तेजी से निर्णय लेने और मॉनिटरिंग के लिए डिपार्टमेंट ने 31 अक्टूबर तक सभी डिवीज़न, सर्कल, चीफ़ इंजीनियर ऑफ़िस और राजीव भवन में 24 घंटे चलने वाले फ़्लड कंट्रोल रूम चालू करने का निर्देश दिया है। इन कंट्रोल रूम में तैनात अधिकारियों को हर समय उपस्थित रहने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम ओडिशा में मानसून और बाढ़ के दौरान प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने और फील्ड-लेवल पर त्वरित आपदा प्रबंधन सुनिश्चित करने में मदद करेगा। विभाग ने अधिकारियों से यह भी कहा है कि वे स्थानीय स्तर पर जलाशयों, नदियों और अन्य जल संसाधनों की स्थिति का लगातार निरीक्षण करें और किसी भी असामान्य स्थिति पर तुरंत हेडक्वार्टर को सूचित करें।
इस फैसले से न केवल आपदा प्रबंधन की तैयारी मजबूत होगी, बल्कि जनता की सुरक्षा और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की गति भी तेज होगी। अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों को लगातार अलर्ट रहने, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने और किसी भी स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने का निर्देश दिया गया है। इस दिशा में उठाया गया यह कदम राज्य में मानसून और बाढ़ के दौरान प्रभावी प्रशासनिक और फील्ड-लेवल तैयारियों का संकेत है।





